वात्सल्य ग्राम में सुचिता ने लिए सौरभ संग सात फेरे

गोपाल चतुर्वेदी 
जी सी न्यूज नेटवर्क 
मथुरा 

वृंदावन। साध्वी ऋतंभरा द्वारा संचालित वात्सल्य ग्राम में पली-बड़ी एक और बेटी ससुराल चली गई। वात्सल्य ग्राम के मीडिया प्रभारी उमाशंकर राही ने बताया कि पालने में 3 दिन की आई नवजात बेटी को साध्वी ऋतंभरा ने शुचिता नाम दिया। पालन पोषण सीता परमानंद के आंचल की छांव में हुई।
शुचिता की प्रारंभिक शिक्षा समविद गुरुकुलम सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुई और उच्च शिक्षा के लिए धर्म पिता संजय गुप्ता के मार्गदर्शन में सीए की शिक्षा प्राप्त प्राप्त की। जब विवाह योग्य हुई तो उसका विवाह पलवल (हरियाणा) के उद्योगपति ज्ञानचंद के पुत्र सौरभ के साथ सुनिश्चित हुआ। बृहस्पतिवार को पलवल से सौरभ की बरात वात्सल्य ग्राम पहुंची। बरातियों का स्वागत मोतियों की मालाओं से किया गया।गोकुलम की माताओं ने लड़के का तिलक किया। जय माला के समय वर-वधु को साधु-संतों और साध्वी ऋतंभरा ने आशीर्वाद दिया। शुचिता के धर्म पिता संजय गुप्ता एवं माता सीता परमानंद ने शुचिता का कन्यादान लिया। 20 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अग्नि को साक्षी मानकर वर-वधु ने सात फेरे लिए। सौरव और शुचिता के विवाह से पहले हल्दी, मेहंदी, मुद्रिका उत्सव, लग्न आदि रस्में हुईं। मां और सहेलियों ने आंसुओं के बीच शुचिता की विदाई की। वात्सल ग्राम में यह 11वीं बेटी का विवाह था।

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